जगदलपुर। बस्तर की पहचान और हजारों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार माने जाने वाले तेंदूपत्तों की बड़ी मात्रा जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सरगीपाल में सड़क किनारे लावारिस हालत में पड़ी मिली है। देखरेख के अभाव में कई बोरियां फट चुकी हैं, जिससे तेंदूपत्ते बाहर निकलकर सड़क पर बिखर रहे हैं।
हादसे के बाद छोड़ दिए जाने की आशंका
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि कुछ दिन पहले तेंदूपत्तों से लदा कोई ट्रक या अन्य मालवाहक वाहन इस मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ होगा। माना जा रहा है कि वाहन को वहां से हटा लिया गया, लेकिन तेंदूपत्तों से भरी बोरियां सड़क किनारे ही छोड़ दी गईं, जिनकी अब तक किसी ने सुध नहीं ली।
बारिश से खराब हो सकता है लाखों का वनोपज
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश के कारण बोरियों में रखे तेंदूपत्ते नमी की चपेट में आ सकते हैं। यदि जल्द इन्हें सुरक्षित स्थान या गोदाम तक नहीं पहुंचाया गया तो यह बहुमूल्य वनोपज खराब हो सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तेंदूपत्तों की बोरियों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बस्तर का यह बहुमूल्य ‘हरा सोना’ पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।

