मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक कथित घोटाला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि विभाग में पदस्थ एक कनिष्ठ अभियंता ने अपनी पत्नी के नाम से संचालित कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विभाग ने संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया है, जबकि उनकी पत्नी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है।
सौर ऊर्जा परियोजना की जांच में सामने आया मामला
पूरा मामला हनुमना क्षेत्र में निर्माणाधीन 2 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र से जुड़ा है। मुख्य अभियंता रीवा की ओर से कराई गई जांच में पता चला कि परियोजना से संबद्ध मेसर्स ओम इंटरप्राइजेज नामक कंपनी कनिष्ठ अभियंता रंजीत कुमार साहू की पत्नी ममता कुमारी के नाम पर संचालित है। जांच के दौरान परियोजना में कई कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।
सरकारी सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
विभागीय जांच में आरोप लगाया गया है कि विद्युत संयोजन और लाइन विस्तार के कार्य के दौरान सरकारी सामग्री का उपयोग निजी कंपनी के लिए किया गया। इतना ही नहीं, इसी कार्य के लिए करीब 1.67 लाख रुपये का बिल भी बिजली कंपनी के समक्ष भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया। जांच में इसी भुगतान से जुड़ी कथित गड़बड़ियां सामने आई हैं।
सरकारी उपकरण मिलने से गहराया मामला
जांच के दौरान सौर ऊर्जा संयंत्र में ऐसे विद्युत उपकरण भी मिले, जिन्हें मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, इंदौर का बताया गया है। इसके बाद विभाग को आशंका है कि सरकारी सामग्री का दुरुपयोग या कथित रूप से अवैध तरीके से इस्तेमाल किया गया हो सकता है। पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
जेई निलंबित, पत्नी पर एफआईआर
मुख्य अभियंता की रिपोर्ट मिलने के बाद कनिष्ठ अभियंता रंजीत कुमार साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं उनकी पत्नी ममता कुमारी, जो संबंधित कंपनी की प्रोपराइटर हैं, उनके खिलाफ हनुमना थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभागीय अधिकारियों ने स्वयं थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
बिजली विभाग का कहना है कि पुलिस जांच और विभागीय जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
विभागीय पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी संसाधनों के संरक्षण और विभागीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताओं में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

