29 एकड़ में मखाना की उपज का संग्रहण शुरू, महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा वैज्ञानिक कटाई-पश्चात प्रबंधन का प्रशिक्षण
मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल, ग्रामीण आजीविका और महिला उद्यमिता के नए अवसर विकसित करने पर जोर
धमतरी, 27 अक्टूबर 2026

धमतरी जिले में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में मखाना की खेती नई संभावनाएं पैदा कर रही है। तालाबों में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल अब परिणाम देने लगी है। इसी कड़ी में ग्राम छाती और डांडेसरा में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 29 एकड़ क्षेत्र में उत्पादित मखाना का संग्रहण शुरू हो गया है। साथ ही, महिलाओं को मखाना के संग्रहण और संग्रहण-पश्चात प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इससे उपज की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना के तहत वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले को तालाबों में मखाना की खेती के लिए 165 एकड़ का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में 105 एकड़ क्षेत्र में मखाना की खेती शुरू की गई। ग्राम राखी, छाती, डांडेसरा और पीपरछेड़ी के साथ नगरी विकासखंड के ग्राम सांकरा में भी इस फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्राम छाती और डांडेसरा में शैलपुत्री स्व-सहायता समूह तथा नई किरण स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए 26 अक्टूबर को मखाना संग्रहण की शुरुआत और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ग्राम छाती-सेनचुवा की सरपंच श्रीमती दानेश्वरी साहू, श्री जितेन्द्र कुमार साहू, पंचगण, कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ श्रीमती दीपिका चंद्रवंशी, उप संचालक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहू, उद्यान विकास अधिकारी श्री राहुल साहू और ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्री नर्मदा प्रसाद भारती उपस्थित रहे।
उप संचालक उद्यानिकी श्रीमती पूजा कश्यप साहू ने बताया कि महिला समूहों को कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में आगामी दिनों में मखाना के संग्रहण-पश्चात प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उपज की उचित देखभाल, प्रसंस्करण और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि महिलाएं इस गतिविधि को आजीविका और उद्यमिता के रूप में आगे बढ़ा सकें।
मखाना की कटाई के चरण
मखाना की कटाई मुख्य रूप से तीन चरणों में की जाती है। पहली कटाई को लहसर कहा जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत मखाना निकाल लिया जाता है। इस काम के लिए श्रमिकों को सामान्यतः प्रति किलोग्राम के आधार पर मजदूरी दी जाती है। इसके बाद दूसरी और तीसरी कटाई मरकट और कर्कट कहलाती है। इन चरणों में बचे हुए लगभग 30 प्रतिशत बीज निकाले जाते हैं, जिसके लिए अधिक मेहनत और समय की जरूरत होती है।
कटाई के बाद की प्रक्रिया
तालाब से मखाना के बीज निकालने के बाद उन्हें अच्छी तरह साफ किया जाता है। काले बीजों को धोकर लगभग 2 से 30 दिनों तक तेज धूप में सुखाया जाता है, ताकि उनकी नमी कम हो सके। इसके बाद बीजों को भट्ठी या मिट्टी की कढ़ाई में भुना जाता है। भुनाई के बाद लकड़ी की थापी से बीजों को फोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से बीज के अंदर का सफेद और कुरकुरा मखाना बाहर निकलता है, जिसे स्थानीय रूप से लावा कहा जाता है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप कृषि की नई गतिविधियों को बढ़ावा देना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन सकती है। इसके लिए उत्पादन के साथ वैज्ञानिक तकनीक, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और बाजार से जुड़ाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़े और वे आत्मनिर्भर आजीविका की दिशा में आगे बढ़ें।
मखाना उत्पादन की यह पहल धमतरी जिले में पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ नए विकल्प जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उचित प्रशिक्षण, गुणवत्ता आधारित प्रसंस्करण और बाजार से बेहतर जुड़ाव मिलने पर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और सामूहिक उद्यमिता के नए अवसर पैदा करने में सहायक होगी।

