छत्तीसगढ़ : भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मूर्ति पूजा और गरबा में भागीदारी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं, इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं ने भी कांग्रेस नेता को घेरना शुरू कर दिया है।
भूपेश बघेल ने भारतीय दर्शन का दिया हवाला
विवाद की शुरुआत छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखने वालों को गरबा में शामिल होने की क्या जरूरत है। उनके इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय दर्शन और देश की विविध धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया।बघेल ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वालों को पहले भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समझना चाहिए। उन्होंने कबीर पंथ, सिख धर्म और सतनाम पंथ का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि इन परंपराओं में मूर्ति पूजा की क्या भूमिका है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में कई ऐसे पंथ हैं, जहां गुरु परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है और मूर्ति पूजा अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है। उनके मुताबिक, किसी भी धार्मिक परंपरा पर टिप्पणी करने से पहले उसके मूल विचारों और मान्यताओं को समझना जरूरी है।
बीजेपी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साधा निशाना
भूपेश बघेल के बयान के बाद बीजेपी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर उन पर सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री के बयान से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए लोगों से इसे अंत तक देखने की अपील की।बीजेपी ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि भूपेश बघेल ने सनातन धर्म का अपमान क्यों किया। इस पोस्ट के जरिए पार्टी ने उनके बयान को लेकर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है।इस घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं को लेकर बहस तेज हो गई है। बीजेपी जहां बघेल के बयान को सनातन धर्म के अपमान से जोड़ रही है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी बात के समर्थन में भारत की विभिन्न धार्मिक परंपराओं का हवाला दिया है।
पूर्व विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी जताई नाराजगी
इस विवाद में बीजेपी के पूर्व विधायक पुरंदर मिश्रा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने भूपेश बघेल के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति के प्रति संवेदनशील होने का दावा करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।मिश्रा ने मूर्ति पूजा को लेकर दिए गए बयान को अनुचित बताया। उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के लोग मूर्ति पूजा में आस्था रखते हैं और बघेल की टिप्पणी राज्य की सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं है।
धार्मिक परंपराओं को लेकर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
मूर्ति पूजा और गरबा में भागीदारी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गया है। एक ओर बीजेपी ने बघेल के बयान को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ने देश की विविध धार्मिक परंपराओं को समझने की जरूरत पर जोर दिया है।अब इस मामले में दोनों दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।

