रायपुर ; शिकायत में कहा गया है कि नए नामांतरण मामलों को पहले आरडी या ई-कोर्ट में दर्ज किए जाने के बजाय आवेदन पर ही निर्देश लिख दिए जाते हैं। इसके बाद पक्षकार या अधिवक्ता को पटवारी से प्रतिवेदन लेने के लिए भेजे जाने का आरोप लगाया गया है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में देरी को लेकर उठे सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया अपनाने से प्रकरण ऑनलाइन सिस्टम में लंबित दिखाई नहीं देता, जबकि उसकी कार्रवाई वास्तविक रूप से चलती रहती है। आरोप है कि बाद के चरण में आदेश जारी करने के समय ही प्रकरण को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है।इस व्यवस्था से प्रकरण की शुरुआत से लेकर अंतिम कार्रवाई तक की ऑनलाइन निगरानी प्रभावित होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे पक्षकारों को अपनी फाइल की वास्तविक स्थिति जानने में परेशानी होती है और उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर भी लगाने पड़ सकते हैं।
मठपुरैना के नामांतरण मामले का दिया उदाहरण
अधिवक्ता विकास गुप्ता ने अपनी शिकायत में ग्राम मठपुरैना की राधिका वैष्णव से जुड़े नामांतरण प्रकरण का भी उल्लेख किया है। शिकायत के मुताबिक इस मामले में 31 जुलाई को ऑफलाइन इश्तेहार और पटवारी के लिए ज्ञापन जारी किया गया था, जबकि प्रकरण की ई-कोर्ट में ऑनलाइन एंट्री 2 सितंबर को हुई।शिकायतकर्ता ने इसी क्रम को आधार बनाकर सवाल उठाया है कि अगर मामले में जुलाई से ही कार्रवाई शुरू हो गई थी, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में शुरुआती प्रक्रिया पहले क्यों दिखाई नहीं दी।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नामांतरण प्रकरणों की शुरुआत से लेकर ऑनलाइन दर्ज होने तक की कार्रवाई की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।इसके साथ ही शिकायत में अतिरिक्त तहसीलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और उनका रायपुर से बाहर स्थानांतरण करने की मांग भी अधिकारियों के सामने रखी गई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

