बिलासपुर : हाईकोर्ट ने अपराध पीड़ितों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि के लंबित रहने के मामले को गंभीरता से लिया है। राज्य में पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत 1099 मामलों में कुल 37 करोड़ 7 लाख 42 हजार रुपये का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण अटकी इस राशि को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
डेढ़ साल से सरकार दे रही है कार्रवाई का भरोसा
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की लगातार निगरानी कर रही है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना 2018 के तहत राशि आवंटित करने और पात्र लोगों तक भुगतान पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।सरकार ने अदालत को यह भी बताया था कि फंड उपलब्ध होते ही लंबित राशि जल्द जारी की जाएगी। हालांकि बड़ी रकम अब भी लंबित होने पर हाईकोर्ट ने मामले में स्पष्ट जवाब और कार्रवाई का विवरण मांगा है।
अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र देना होगा
हाईकोर्ट ने सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि 37.07 करोड़ रुपये की लंबित क्षतिपूर्ति राशि जारी करने के लिए अभी तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।इसके साथ ही अदालत ने शेष राशि के भुगतान की समयसीमा भी बताने को कहा है। यानी सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि पात्र अपराध पीड़ितों को उनकी क्षतिपूर्ति कब तक उपलब्ध करा दी जाएगी।
अलग बजट हेड बनाने की भी दी गई थी जानकारी
मामले की पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के लिए अलग बजट हेड तैयार किया गया है। इसके बावजूद 1099 मामलों में भुगतान लंबित रहने पर हाईकोर्ट ने सरकार से प्रगति का स्पष्ट ब्यौरा मांगा है।अब अदालत की निगाह इस बात पर रहेगी कि लंबित राशि जारी करने के लिए सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और पात्र पीड़ितों को भुगतान कब तक मिलता है।
23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई में सक्षम अधिकारी के शपथपत्र के आधार पर लंबित क्षतिपूर्ति राशि को लेकर सरकार की कार्रवाई और प्रस्तावित समयसीमा की समीक्षा की जाएगी।