सरगुजा : अंबिकापुर में पहाड़ी कोरवा और पंडो जनजाति के लोगों में लंबे समय से बने रहने वाले बुखार के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अब अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ने इन मामलों के कारणों का पता लगाने के लिए जांच और रिसर्च शुरू कर दी है। मेडिसिन विभाग के HOD डॉ. पंकज टेभूलकर के अनुसार, अब तक करीब 72 लोग लगातार बुखार से प्रभावित मिले हैं।
पांच दिन बाद भी बुखार रहे तो होगी विशेष जांच
डॉ. टेभूलकर के मुताबिक जिन मरीजों का बुखार पांच दिन उपचार के बाद भी कम नहीं होता, उनकी विस्तृत जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमणों की भी जांच की जा रही है। चिकित्सकों का मानना है कि बीमारी की समय पर पहचान होने से मरीज को गंभीर अवस्था में पहुंचने से रोका जा सकता है।
इन संक्रमणों का समय पर उपचार नहीं मिलने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। खास तौर पर किडनी और लिवर पर गंभीर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से लंबे समय से बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
तीन विभाग मिलकर तलाशेंगे लगातार बुखार की वजह
मेडिकल कॉलेज ने मामले की पड़ताल के लिए मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रो बायोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम तैयार की है। यह टीम प्रभावित गांवों में जाकर मरीजों की जांच करेगी और जरूरत के अनुसार सैंपल भी जुटाएगी।
रिसर्च का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि जनजातीय क्षेत्रों में लगातार बुखार के पीछे कौन सा कारण जिम्मेदार है और क्या किसी विशेष संक्रमण की वजह से बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।
उष्णकटिबंधीय देशों में भी पाए जाते हैं ऐसे संक्रमण
डॉ. टेभूलकर के अनुसार लेप्टोस्पाइरोसिस जैसे संक्रमण उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में देखे जाते हैं। ब्राजील और पेरू जैसे देशों में भी इनके मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि सरगुजा में सामने आए मामलों का वास्तविक कारण अभी जांच के दायरे में है। सैंपल और विस्तृत जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस को लेकर डॉक्टर ने किया स्पष्ट
डॉ. टेभूलकर ने बताया कि लेप्टोस्पाइरा कोई वायरस नहीं बल्कि बैक्टीरिया है। इसी तरह स्क्रब टाइफस भी बैक्टीरियल संक्रमण है। इसलिए लगातार बुखार को सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है।