दो कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उठी नियुक्ति की मांग
मामला छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के दो कर्मचारियों मदन कुमार पांडा और शैलेन्द्र कुमार जॉन्सन की सेवा के दौरान हुई मृत्यु से जुडा है। दोनों की मृत्यु के बाद उनकी विवाहित बेटियों अंकिता मिश्रा और शीना डेविड ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।बैंक ने दोनों के आवेदन स्वीकार नहीं किए। इसके बाद बेटियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 7 मई 2026 को सिंगल बेंच ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इस आदेश के खिलाफ दोनों ने डिवीजन बेंच के समक्ष रिट अपील दाखिल की।
विवाहित बेटे को लाभ, बेटी को वंचित करना समानता के खिलाफ
डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि बैंक ने बेटियों के विवाहित होने को नियुक्ति से इनकार का आधार बनाया था। वहीं इसी योजना के तहत विवाहित बेटों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जा रहा था।कोर्ट ने इस अंतर को समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल विवाह की स्थिति के आधार पर महिला को अनुकंपा नियुक्ति के अवसर से वंचित करना उचित नहीं है।
शादी के बाद निर्भरता खत्म मानना सही नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि बेटी की शादी हो जाने से यह स्वतः नहीं माना जा सकता कि उसका अपने माता-पिता के प्रति आर्थिक या सामाजिक दायित्व अथवा निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो गई है।अदालत के अनुसार प्रत्येक मामले में वास्तविक परिस्थितियों और निर्भरता का आकलन किया जाना आवश्यक है। केवल वैवाहिक स्थिति को आधार बनाकर किसी आवेदक की पात्रता तय नहीं की जा सकती।
बैंक के आदेश और सिंगल बेंच का फैसला निरस्त
डिवीजन बेंच ने दोनों बेटियों के आवेदन खारिज करने वाले बैंक के आदेशों को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सिंगल बेंच के 7 मई 2026 के फैसले को भी निरस्त कर दिया गया।अब बैंक को दोनों अपीलकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता और लागू नियमों के आधार पर 90 दिनों के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।